यह पुस्तक श्रवणबाधित विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि पर आधारित एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें यह दर्शाया गया है कि ध्वनि-हीन वातावरण में पले-बढ़े विद्यार्थी किस प्रकार भावनात्मक जागरूकता, सहनशीलता, आत्मविश्वास और सामाजिक समझ विकसित करते हैं।विशेष शिक्षा, मनोविज्ञान तथा समावेशी शिक्षा से जुड़े शिक्षकों, शोधकर्ताओं, अभिभावकों और प्रशिक्षकों के लिए यह पुस्तक एक मूल्यवान संसाधन है। इसमें ऐसे प्रभावी शैक्षणिक तरीकों और सहयोगी वातावरण पर प्रकाश डाला गया है जो श्रवणबाधित विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करते हैं।यह पुस्तक सहानुभूति, संवेदनशीलता और समझ विकसित करते हुए समाज में सकारात्मक और समावेशी दृष्टिकोण बनाने की दिशा में एक प्रेरक कदम है।
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डॉ. अवनीश कुमार मिश्र एक समर्पित शिक्षाविद् एवं विशेष शिक्षण विशेषज्ञ हैं। उन्होंने श्रवण बाधित शिक्षा में विशेषज्ञता के साथ विशेष शिक्षा में पी-एच.डी. प्राप्त की है। पाँच से अधिक वर्षों के शैक्षणिक अनुभव के साथ, वे समावेशी शिक्षा, श्रवण बाधित बच्चों में श्रवण-वाक् एवं भाषा विकास तथा हिंदी शिक्षण-शास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उनका शोध कार्य श्रवण बाधित विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि एवं संवेगात्मक स्थिरता पर केंद्रित है, जो विशेष बच्चों की भावनात्मक एवं शैक्षणिक प्रगति को समझने में महत्वपूर्ण है।
डॉ. मिश्र ने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में सहायक प्रोफेसर एवं पाठ्यक्रम समन्वयक के रूप में कार्य किया है तथा अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं एवं फेकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में सक्रिय सहभागिता की है। एक समर्पित शिक्षक के रूप में उनका उद्देश्य विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों के लिए समावेशी एवं सहयोगपूर्ण शैक्षणिक वातावरण बनाना है, जहाँ वे अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सकें।
समावेशी शिक्षा को सशक्त बनाने और सभी शिक्षार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में डॉ. मिश्र निरंतर प्रयासरत हैं।
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